शनिवार, 8 सितंबर 2012

फिर छोड़ कर चले गए

फिर छोड़ कर चले गए 
मिल तो लेते कम से कम 
जाने से पहले दर्शन 
तो दे देते 
जिससे हम भी तसल्ली 
दे देते अपने जिगर को 
पर तुम्हे तो परवाह 
ही नहीं है 
कितना कष्ट होता है 
बिछुड़ने का 
तू तो घर जाकर 
बहुत खुश होगे 
क्योंकि माँ बाप जो 
तुम्हे मिल गए होंगे 
पर हम चाहते हैं 
तुम्हे उतना ही 
जितना की तुम्हारे अपने 
वो बात अलग है 
कि तुम मुझे कितना 
अपना समझती हो 
मै तो बाट जोह रहा हूँ 
तुमसे फिर से मिलन को 
जबकि पता है 
तुम इस बार आओगी 
दिनों में 
पर हम झेल लेंगे सारा कष्ट 
तुमसे मिलन को 
बिन बताये तुम घर चले गए 
करके अकेले (भूपेन्द्र प्रताप सिंह )

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